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Friday, March 8, 2013

खामोश लम्हे

कल घर की सफाई करते हुए,
हमारे तुम्हारे बीच के
कुछ खामोश लम्हे,
एक कोने में, फर्श पर
बिखरे मिले थे,
शायद गुज़रते वक़्त से
छिटक कर गिरे होंगे..
उठाकर उन लम्हों को
मैने अपनी यादों में,
बड़ी हिफ़ाज़त से
फिर रख लिया है,
मुझे यकीन है
तुम आओगे एक दिन,
इन आख़िरी बचे लम्हो को
जलाने के लिए.....

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12 53 am,
Thursday
February, 2013