उस काले घने बदल के बीच में से,
जब चाँद झँकता है,
और खिलखिलाकर बादलों के पीछे,
एक बार फिर छिप जाता है,
तो ऐसा लगता है जैसे,
तुमने सिखाया हो उसको,
दो पल ठंडी रोशनी भरकर,
फिर वापस चले जाना....!
झम झम आवाज़ करते हुए,
वो आवारगी से बरसता पानी,
फुहार से एकाएक, खिड़की के अंदर,
चेहरे पर भीनी सी नमी दे जाता है,
ऐसा लगता है जैसे,
तुमने सिखाया हो उसको,
चेहरे पर ताज़गी देकर,
जीवन के नीरस होना का एहसास करा जाना...!