फूल हो तुम, क्यूँ वक्त जाया कर जाओगे..
पास आओगे तो, इस आग से जल जाओगे..!!
तुम्हें अंदाज़ा नहीं है इस समंदर की गहराई का..
इसमें उतरोगे तो, बेवजह डूब के बह जाओगे..!!
उस खुदाई तो रोज़ का खेल है तमाशा बनाना..
टूट जाएगा तो, फिर क्यूँ आशियाँ बनाओगे..!!
जब कभी पूछोगे तो जवाब मिलेगा "आवारगी",
वो खुदाई और तुम, बस मुस्कुरा के रह जाओगे...!!
पास आओगे तो, इस आग से जल जाओगे..!!
तुम्हें अंदाज़ा नहीं है इस समंदर की गहराई का..
इसमें उतरोगे तो, बेवजह डूब के बह जाओगे..!!
उस खुदाई तो रोज़ का खेल है तमाशा बनाना..
टूट जाएगा तो, फिर क्यूँ आशियाँ बनाओगे..!!
जब कभी पूछोगे तो जवाब मिलेगा "आवारगी",
वो खुदाई और तुम, बस मुस्कुरा के रह जाओगे...!!
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